डार्क लेडी सानेट नं 127 : असली सुंदरता कौन है
सानेट नं 127
आइए शुरुआत करते हैं पहले डार्क
लेडी सानेट् यानि सानेट नं 127 से । जैसा की आप जानते हैं शेक्सपियर ने किसी सानेट
को कोई शीर्षक नहीं दिया । पाठकों द्वारा अपने उल्लेख मे सुविधा के लिए या तो
सानेट नंबर का जिक्र किया गया , या सानेट्स की पहली पंक्ति ही उसका शीर्षक बना दी जाती थी । अतः इस सानेट का
शीर्षक है , In the old age, black was not counted fair.
मैंने पाया है की शेक्सपियर के
सानेटस मे कविता की पहली पंक्ति , उस
कविता के सार या मूल भाव का प्रतिनिधित्व
नहीं करती थी। जबकि हिन्दी कविता मे शीर्षक से ऐसी ही अपेक्षा रहती है । इसलिए
मैंने अपने हिन्दी काव्य रूपांतरण मे ,हर सानेट का, अपने हिसाब से, एक उपयुक्त
शीर्षक भी दिया है , जो एक नया प्रयोग है।
पूरी कविता,सानेट 127, मूल रूप
मे इस प्रकार है :
In the old age, black was not counted
fair
Or if it were,it
bore not beauty’s name
But now is black
beauty’s successive heir
And beauty
slander’d with a bastard shame
For since each
hand hath put on nature’s power
Fairing the foul
with art’s false borrowed face
Sweet beauty
hath no name,no holy bower,
But
is profaned , if not lives in disgrace
Therefore
my mistress’ brows are raven black
Her
eyes so suited ,and they mourners seem
At
such who,not born fair,no beauty lack
Sland’ring
creation with a false esteem
Yet
so they mourn becoming of their woe
That
every tongue says beauty look so .
मेरे
अध्ययन से इसका हिन्दी सारांश , इस प्रकार बनाता है :
पुरानी मान्यताओं मे, गोरा होना
सुंदर होने के लिए जरूरी था। पर
आज की दुनिया को सांवली त्वचा , काले बाल और
काली आँखों वाली स्त्रियाँ भी सुंदर लगती
हैं।पर दुख की बात है कि सांवली स्त्रियाँ
भी अपना मूल्य नहीं समझतीं , वे भी पुरानी
सोच की शिकार हैं और गोरेपन के माध्यम से
सुंदरता तक पहुचने के प्रयास मे ,अपने चेहरे को बनावटी तरीके से ऐसे सफेद
बनाती हैं जिससे सुंदरता दोगली दिखती है ।
उनकी असलियत जानने के बाद , आज के लोगों का सुंदरता पर भरोसा नहीं रहा और इसके उपासक नहीं
रहे .कवि कहता है, मेरी प्रिया के काले रंग
मे निहित सुंदरता मुझे बहुत लुभाती है क्योंकि वो बनावटी शृंगार नहीं करती । पर
उसकी आँखों का रंग मानो इस बात का शोक
मनाने के लिए काला हुआ हो कि स्त्रियाँ अप्राकृतिक तरीकों से सुंदरता की मौलिकता
और विश्वसनीयता खतम करके उसे एक बुरा नाम दे
रही है। जो भी हो, मुझे लगता है
सबका यही कहना है की सुंदरता मेरी प्रिया के उसे साँवले चेहरे जैसे होनी चाहिए जो अपने प्राकृतिक मूल रूप मे रखा गया है ।
.
अब
प्रस्तुत है इसका काव्य रूपांतरण
सानेट 127
असली सुंदरता कौन है
पुरानी सोच का
आतंक
काला होना था महा कलंक
जो गोरा नहीं, अच्छा ही नहीं
सुंदरता मे तो शून्य अंक
पर आज नई सोच लिए
नया जमाना आया है
काले को भी गोरे जैसा
सौन्दर्य बोध दिलाया है
काले गोरे हर रंग से
यौवन करता शृंगार है
सुंदरता
के सिंहासन पर
बराबर का अधिकार
है
लेकिन कुछ सावली सुंदरियाँ
गलत रास्ते जाती हैं
श्यामल सुंदरता को ढकने
सफेद परत लगाती हैं
अब जो सुंदरता दिखती है
कुछ असली है कुछ नकली है
पहले के कम हो ज्यादा हो
पर शुद्ध नहीं , दोगली है
सुंदरता देने का अधिकार
प्रकृति से जबरन हड़प रहीं
यहाँ वहाँ से जोड़- जुटा
उधारी चेहरा पहन रहीं
नकली को असली दिखलाने
प्रकृति से जबरन उलझ रहीं
अब कहां है असली सुंदरता
मिलता न उसका नामो- निशां
सौन्दर्य के आगे अब कोई
नतमस्तक दिखता है कहां
अब
सुंदरता भले ही ना हो
अनादर के
अंधेरे मे
इसकी
पवित्रता मौलिकता
घिर
चुकी संदेह के घेरे मे
मेरी प्रिया की भौहें
काले कौवे सी काली
मिलती जुलती काली आँखें
जैसे शोक मे तपी रुदाली
शोक उस मतिभ्रम का
जो साँवलियों पे छाया है
वो गोरी पैदा नहीं हुई
पर सुंदरता मे कमी नहीं
उनको सफेद परतों ने
गंदा सा नाम दिलाया है
पर जो भी हो मुझको है यकीं
सबके होंठों पर बात यही
सौन्दर्य की असली छवि
वही
उस शुद्ध श्यामली मे जो बसी .
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