डार्क लेडी सानेट 128 : मैं और तेरा पियानो

 

Sonnet 128

 

शेक्सपियर द्वारा रचित डार्क लेडी सानेट्स की शृंखला का यह दूसरा सानेट है

इसमे एक प्रेमी उस निर्जीव पियानो से भी ईर्ष्या करता है जो उसकी प्रेमिका बजाती है । फिर वो 3 तरह के चुंबन परिभाषित करके सबसे अच्छा वाला अपने लिए माँगता है .यह कविता उस हिन्दी फिल्मी गीत से मिलती जुलती है ..

  • हमसे तो अच्छी तेरी पायल गोरी   कि  बार- बार तेरा बदन चूमे .. ( फिल्म : गंवार )


मूल रचना इस प्रकार है :

How oft when thou,my music, music play’st

Upon that blessed wood whose motion sounds

With thy sweet fingers when thou gently sway’st

The wiry concord that mine ear confounds

 

Do I envy those jacks that nible leap

To kiss the tender inward of thy hand,

Whilst my poor lips which should that harvest reap

At the wood’s boldness by thee blushing stand!

 

To be so tickled, they would change their state

And situation with those dancing chips,

O’er whom thy fingers walk with gentle gait,

Making dead wood more bless’d than living lips.

Since saucy jacks so happy are in this,

Give them thy fingers,me thy lips to kiss.

 

 

 

एक प्रेमी के मन में केवल आसक्ति और समर्पण की भावना ही आती हो, ऐसा नहीं है। बहुत सारी ऐसी भावनाएं हैं जिन्हें हम गलत भावनाओं की श्रेणी मे रखते हैं, पर प्रेमी के मन मे जब ये आती हैं तो इन भावनाओं को भी वैधता मिल जाती है । मिसाल के तौर पर जलन की भावना , जिसपर ये सानेट केंद्रित है। हम सब ये मानते हैं की दूसरों के सुख और साधन  को देखकर जलना  अच्छे लोगों का काम नहीं । पर प्रेम मे तो अगर प्रिय के प्रति आपके एकाधिकार पर जरा सी भी कमी आती है तो आप जल उठते हैं। न केवल मनुष्यों से बल्कि कीड़े मकोड़ों से भी और निर्जीव वस्तुओं से भी आप जल उठते हैं अगर वो आपके प्रिय के इतना करीब आ जाए, या इतनी बार करीब आ जाए  जितना आप नहीं आ पा रहे .पर चूकि इस जलन का संबंध प्रेम से है,नफरत से नहीं,इस जलन की अभिव्यक्ति को भी प्रेम की अभिव्यक्ति मानकर इसे पवित्र बना दिया जाता है।

एक प्रेमी द्वारा इस प्रकार के भाव की अभिव्यक्ति  बहुत से हिन्दी गीतों मे भी देखने को मिली है । जैसे

  • हमसे तो अच्छी तेरी पायल गोरी  कि  बार- बार तेरा बदन चूमे .. ( फिल्म : गंवार )
  • मुझसे भले तो चांदी के बटन तेरे जो कुर्ते पे तूने लगाए, वो पास कितने मई दूर कितना, कैसे मुझे चैन  आए .. ( फिल्म आशा )

शेक्सपियर ने इस सानेट मे अपनी जलन, पियानो जैसे  वाद्य  यंत्र जिसमे अलग- अलग सुरों को बजाने के  लिए अलग अलग जैक्स को दबाना पड़ता है, के लकड़ी के जैक्स प्रति व्यक्त की है जो उसकी प्रिय के हाथों की  उंगलियों को बार बार स्पर्श करते हैं ।

आशा है आप इस सानेट की प्रकृति को समझ गए होंगे ।

इस सानेट को समझने के लिए एक मजेदार बात का ज्ञान होना सहायक होगा । अंग्रेजी संस्कृति की बात है इसलिए भारतीय इसे नहीं जानते हैं।

यह बात है 3 प्रकार  के चुंबन की ।

पहले प्रकार मे साधारण चुंबन आता है । मान  लीजिए आपकी महबूबा ने अपना हाथ आपके हाथ मे इस तरह दिया की उसके हाथ का ऊपरी हिस्सा, जो हथेली की तुलना मे काला होता है, ऊपर है और हथेली वाला हिस्सा नीचे छुपा है। तब आप अगर उसका हाथ अपने हाथों से उठाकर  चूमेंगे तो आप ऊपरी यानि काले हिस्से को चूमेंगे। ये होगा तीसरे दर्जे का यानि साधारण चुंबन .ज्यादातर अंग्रेजों को प्यार के प्रारम्भिक दिनों मे यही नसीब होता है .

अब दूसरे तरह के यानि माध्यम प्रकार के चुंबन को देखते है। मान  लीजिए आपकी प्रेयसी ने अपने हाथ आपके होंठों पर खुद ही रख दिया तो जाहिर  है जो भाग  आपके होंठों को छूएगा वो अंदर वाला यानि गोरा वाला होगा । अगर इस समय आप ने उसके हाथों का चुंबन लिया तो यह चुंबन पहले चुंबन के बढ़कर होगा जिसे हम माध्यम दर्जे का चुंबन कहेंगे । शेक्सपियर की नजर मे जब उनकी प्रेमिका पियानो बजाती  है तो पियानो के बटन को इस तरह दबाती है कि उन बटनों को मध्यम दर्जे का चुंबन मिलता है जो शेक्सपियर को मिलने वाले तीसरे दर्जे के चुंबन से बेहतर होता है. .

अब सबसे अच्छा यानि उत्तम चुंबन कब होगा? ये तब होगा जब आपके होंठों के ऊपर वो अपने होंठों को रख दे।

आइए अब मेरे द्वारा इस सानेट का हिन्दी काव्य रूपांतरण देखिए :



सानेट 128

मैं और तेरा पियानो 

 

तू  मेरे मन के तारों को झनकाए

मेरे लिए तू प्यारा संगीत कहलाए  

 

जब तू किसी पियानो से संगीत निकाले

उस लकड़ी के खुल जाएं  भाग्य के ताले

जो  तेरी उंगलियों का  स्पर्श सुख  पा ले

 

हल्के से थिरकती  वो नरमों’ नाजुक उँगलियाँ

तारों का संगीत घोले मेरे  कानों मे  बेचैनियां

 

 पियानो के जैक से मुझे सचमुच है जलन

तुम्हारी नरम  उँगलियाँ छूती उसका हैं  उसका तन

नीचे से वो ले लेता है  कोमल पृष्ठ  का चुंबन

मदमस्त होकर करता धीनक धीनक  नर्तन

 

इस  सुख के मोहताज  मेरे अधर बिचारे

 नहीं आती ये बहार भाग्य मे हमारे

जैक की ढिठाई  मैं अपमान से  लाल  

तू संगीत मे झूमे  मैं टीस  से बेहाल  

 

जी करता है जैक से

एक अदला - बदली कर डालूँ   

लेकर उसकी जड़ता

उसमे जान भर डालूँ

अपनी जगह उसको बैठाऊँ

खुद  पियानो मे सज जाऊँ

हर  छुअन की गुदगुदी

उसकी  जगह मैं पाऊं

 

पर ऐसा भी हो न  पाया

बैठे रहते हैं हाथ मले

सोचते है हम जिंदों  से

वो शातिर बेजान भले

 

तेरी उंगलियाँ उन  जैक पर

 मद्धिम नाजुक चाल चलें

मेरे जीवित अधरों से ज्यादा

 मृत लकड़ी के भाग्य फलें

 

हम दोनों की खुशियां हैं तुम्हारे हाथ में

वो लंपट  खुश है अगर इन हालात मे  

उंगलियों से उसे छूओ उसे झूमने दो

मुझे  तुम अपने होंठ दे  दो , चूमने दो  .. 

 

 

 

 

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