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Showing posts from October, 2020

डार्क लेडी सानेट 129 : रति सुख मे क्या रखा है

Sonnet 129               रति सुख मे क्या रखा   है                                                                            तुमने आज क्षणिक  सुख पाया                                       कितना भारी  मूल्य चुकाया                                       झोंकी सारी  संचित ऊर्जा                                       गई तुम्हारी तन  की लज्जा                  आसक्ति का था वो  आवेग       ...

डार्क लेडी सानेट 128 : मैं और तेरा पियानो

  Sonnet 128   शेक्सपियर द्वारा रचित डार्क लेडी सानेट्स की शृंखला का यह दूसरा सानेट है इसमे एक प्रेमी उस निर्जीव पियानो से भी ईर्ष्या करता है जो उसकी प्रेमिका बजाती है । फिर वो 3 तरह के चुंबन परिभाषित करके सबसे अच्छा वाला अपने लिए माँगता है .यह कविता उस हिन्दी फिल्मी गीत से मिलती जुलती है .. हमसे तो अच्छी तेरी पायल गोरी   …  कि  बार- बार तेरा बदन चूमे .. ( फिल्म : गंवार  ) मूल रचना इस प्रकार है : How oft when thou,my music, music play’st Upon that blessed wood whose motion sounds With thy sweet fingers when thou gently sway’st The wiry concord that mine ear confounds   Do I envy those jacks that nible leap To kiss the tender inward of thy hand, Whilst my poor lips which should that harvest reap At the wood’s boldness by thee blushing stand!   To be so tickled, they would change their state And situation with those dancing chips, O’er whom thy fingers walk with gentle gait, Making dead wood more bless’d than l...

डार्क लेडी सानेट नं 127 : असली सुंदरता कौन है

  सानेट नं 127   आइए शुरुआत करते हैं पहले डार्क लेडी सानेट् यानि सानेट नं 127 से । जैसा की आप जानते हैं शेक्सपियर ने किसी सानेट को कोई शीर्षक नहीं दिया । पाठकों द्वारा अपने उल्लेख मे सुविधा के लिए या तो सानेट नंबर का जिक्र किया गया , या सानेट्स की पहली पंक्ति ही   उसका शीर्षक बना दी जाती थी । अतः इस सानेट का शीर्षक है , In the old age, black was not counted fair.   मैंने पाया है की शेक्सपियर के सानेटस मे   कविता की पहली पंक्ति , उस कविता के सार या   मूल भाव का प्रतिनिधित्व नहीं करती थी। जबकि हिन्दी कविता मे शीर्षक से ऐसी ही अपेक्षा रहती है । इसलिए मैंने अपने हिन्दी काव्य रूपांतरण मे ,हर सानेट का, अपने हिसाब से, एक उपयुक्त शीर्षक भी दिया है , जो एक नया प्रयोग है।   पूरी कविता,सानेट 127, मूल रूप मे इस प्रकार है :   In the old age, black was not counted fair Or if it were,it bore not beauty’s name But now is black beauty’s successive heir And beauty slander’d with a bastard shame   For since each hand hath put on nature’s...

डार्क लेडी सानेट्स - एक परिचय

  डार्क लेडी सानेट्स - एक परिचय   जब कोई साहित्यकार किसी पुरानी लेकिन प्रबल सोच के विरोध मे एक अपारंपरिक तर्क और तथ्य के साथ उतरता है तो पूरे समाज का ध्यान उसपर केंद्रित हो जाता है । हर पाठक उसकी   अपने ढंग से समीक्षा प्रारंभ कर देता है।साहित्यकार की इस नई सोच से , जिन रूढ़िवादी और कट्टर पंथी लोगों की   भावनाएं और मान्यताऐं आहत   होती हैं, वे उसे गलत साबित करने या उसे कवि के निजी जीवन के किसी अपवाद के साथ जोड़ने मे लग जाते   हैं ताकि यह नया विचार अगर झूठ न ठहराया जा सके तो काम से काम एक अपवाद के रूप मे जाना जाए   और पुरानी मान्यताओ का स्थान न   ले पाए ।   शेक्सपियर ने भी अपने डार्क लेडी सानेट्स   मे कुछ ऐसा ही दर्शन सामने रखा । एलीजाबेथन युग की रंग भेद वाली रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी । ये कहा कि   काली त्वचा , काले बाल भी एक अलग सुंदरता रखते है। ये जरूरी नहीं की चमड़ी सफेद हो, बाल और आँखें भूरी हो तभी कोई नारी सुंदर कही   जाए। पागल लोगों ने उस स्त्री को ढूँढना शुरू किया जिसके प्यार मे दीवाने होकर शेक्सपियर ये सब अनाप शना...