डार्क लेडी सानेट 129 : रति सुख मे क्या रखा है

Sonnet 129              

रति सुख मे क्या रखा  है                              

 

                                          तुमने आज क्षणिक  सुख पाया

                                      कितना भारी  मूल्य चुकाया

                                      झोंकी सारी  संचित ऊर्जा

                                      गई तुम्हारी तन  की लज्जा

 

               आसक्ति का था वो  आवेग

              वो गया तो आकर्षण भी गया

                हत्यारे  खूनी कृत्य मे   

               कसमों का पालन भी गया  

 

                                     सारे इल्जाम  तुम्हारे नाम  

                                     वहशी , अतिवादी ,बेलगाम

                                       पूरे  जंगली पूरे  जाहिल

                                     किसी  भरोसे के नाकाबिल 

 

                        सुख आनंद के व्याकुल  क्षण

                         झट से  आए, पट से भागे  

                        उनके जाते ही मन में 

                           भाव घोर घृणा के जागे  

 

ये कृत्य जबतक किया नहीं

तुम लगे  रहे शिकारी जैसे   

कर चुके ,तो मन ऐसे टूटा   

भरी हो नफरत  सारी  जैसे  

 

कोई चारा रखा हो जाल मे   

और तुमने मुँह डाला उसमे  

दुष्ट शिकारी ने डाली हो

पागलपन  वाली दवा उसमे

 

उसे खोजने मे , थे पागल

उसके मिलने मे, हुए पागल

जो ढूंढा वो मिला, फिर भी  

थे  पागल, रह गए  पागल

 

मिलने के बाद की, सोच मे   

मिलने के पल के, भोग मे

मिलने वाले की, खोज मे

यूं पाँव तुम्हारे फिसलते गए   

तुम हद से आगे निकलते गए   

 

रति सुख जबतक जारी है

परमं आनंद की पारी  है

जैसे ही ये तूफान थमे

महा  संताप की बारी है

 

आगे  एक खुशी का वादा है

पीछे एक सपना आधा है

 

ये सब बातें सबको है पता

पर कोई नहीं जो जानता

कैसे उस स्वर्ग को बंद करें

जो है नरक  का रास्ता  

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इस सानेट के बारे मे …

 

शेक्सपियर द्वारा रचित डार्क लेडी सानेट्स की शृंखला का यह तीसरा  सानेट है

मूल रचना इस प्रकार है :

The expense of spirit in a waste of shame

Is lust in action; and till action, lust

Is perjured, murd‘rous, bloody, full of blame

Savage, Extreme, rude, cruel, not to trust

 

Enjoy’d no sooner but despised straight,

Past reason hunted, and no sooner had

Past reason hated ,as a swallow’d bait

On purpose laid to make the taker mad;

 

Mad in pursuit and in possession so;

Had, having, and in quest to have, extreme;

A bliss in proof, and proved, a very woe;

Before, a joy proposed; behind, a dream.

 

All this the world well knows; yet none knows well

To shun the heaven that leads men to this hell.

 

मेरे विचार :

 इस सानेट मे , जैसा की आपने देखा , रति सुख की निरर्थकता और उससे जन्मी ग्लानि और अन्य अवसादकारी भावनाओं के बारे मे कहा गया है ।

 इसमे किसी नायिका का जिक्र नहीं है,फिर भी यह डार्क लेडी सानेट मे ही गिना जाता है . इसे इस तरह से उचित ठहराया जा सकता है कि  यह डार्क लेडी सानेट्स की लंबी शृंखला के बीच का एक सानेट है और बाकी दो  श्रेणियों , मैरेज सानेट और फेयर यूथ सानेट के से इसका विषय कुछ अलग है 

 इसमे शेक्सपियर ने अपने आप को कविता मे शामिल नहीं किया है । वो किसी अनजान व्यक्ति जिसने रति सुख पाया है उसे संबोधित करके कुछ लिख रहे हैं।

पर बात ये भी है की अगर आपने ये भावनाएं अपने समय मे अनुभव नहीं कीं , तो कैसे कह सकते हैं की ये भावनाएं इसी क्रम मे ,इस दौरान , मन मे आती हैं ।  एक कवि अपनी कविता मे वर्णित तथ्यों का जब कोई बाहरी स्रोत नहीं बताता एक पाठक के लिए वो सारे तथ्य ,कवि के अपने  अनुभव और अपनी सोच ही होते हैं .

शेक्सपीयर ने लेखन की गरिमा बनाए रखते हुए किसी भी विचार को बहुत संक्षिप्त मे लिखा है । न कोई स्पष्टीकरण दिया न कोई उदाहरण। आम तौर पर कवि इस बात से  भयभीत रहते हैं की पाठक तो उतना ज्ञानी नहीं हैं , लिहाजा  उनकी भावनाओ को पाठकों तक पहुचाने मे कुछ विस्तार और स्पष्ट वर्णन होना चाहिए। 

पर रति क्रिया  से संबंधित उद्गार मे अगर मे  विस्तृत विवरण और स्पष्टीकरण देने लगें  तो एक  अनावश्यक और परिहार्य अश्लीलता का प्रदर्शन होगा। इसलिए शेक्सपियर ये तो बताया की रति क्रिया के दौरान तुम कभी निर्दयी हुए कभी खूनी कभी हिंसक पर ये स्पष्ट करना उचित नहीं समझा की किस क्षण और क्या करते हुए तुम क्या हुए । 

अतः इसके काव्य रूपांतरण मे मैंने भी मैंने अनावश्यक विस्तार से परहेज रखा है और पाठकों की समझ पर भरोसा रखा है । 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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